सुन सिव के भ्रम भंजन वचना, मिटि गई सब कुतरक के रचना !
भय रघुपति पद प्रीति प्रतीती, दारुन असम्भावना बीती !!
शिव जी के भ्रम नाशक वचनों को सुनकर पार्वती जी के सब कुतरक समाप्त हो गए और रघुनाथ जी ही परमात्मा हैं ये परम विश्वाश हो गया और श्री राम जी के चरणों में विश्वाश एवं प्रीति हो गयी !
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