मंगलवार, 14 जनवरी 2025

श्री राम चरित्र मानस - बाल काण्ड


 दो : -  हिय हरषे कामारि तब, संकर सहज सुजान !

बहु विधि उमहिं प्रसंसि पुनि, बोले कृपानिधान !!

पार्वती जी की राम जी के प्रति प्रीति जान कामदेव के शत्रु शंकर जी ह्रदय में प्रसन्न हो कर बोले !

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