नाथ धरेउ नर तनु केहि हेतू, मोहि समुझाउ कहहु वृषकेतु !
उमा वचन सुनि परम बिनीता, राम कथा पर प्रीति पुनीता !!
पार्वती जी ने पूछा शिव जी से कि आप धर्म की पताका हैं , मुझे समझा कर कहिये राम जी ने किस कारण से मनुष्य का शरीर धारण किया हैं ! पार्वती जी के नम्र वचन सुनकर शिव जी ने जान लिया के पार्वती जी की श्री राम पर पवित्र प्रीति है !
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